पूरन चला गया पर दर्द और गम का अथाह समंदर छोड़ गया...




पूरन चला गया पर दर्द और गम का अथाह समंदर छोड़ गया...

(अमित तिवारी) कासगंज : क़स्बा बिलराम के रहने वाले धनहीन भूमिहीन अन्नहीन गृहविहीन कर्ज तले दबे एक सख्स पूरन ने 30 अगस्त की शाम फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, अब सवाल है कि पूरन की मौत के बाद उसके रोते बिलखते पत्नी और तीन मासूम बच्चों का क्या होगा, जब पूरन था तब थोड़ी बहुत मजदूरी कर अपने बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम बमुश्किल कर पाता था, अब वो इस दुनिया में नहीं हैं, 




उसने अपने पत्नी बच्चों को भूंख से तड़फता देख फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है,
मैं और मेरे साथी बरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र पालीवाल सोमवार 9 सितम्बर को मृतक पूरन के घर बिलराम पहुंचे, पूरन के पत्नी बच्चे भाई बहन रिश्तेदार सभी का रो-रोकर बुरा हाल था, पूरन तो चला गया पर दर्द और गम का अथाह समंदर छोड़ गया, जो भी पूरन के परिवार से मिला है... वह इस दर्द और स्थिति को महसूस कर सकता है कि आज उसका परिवार किस मोड़ पर खड़ा है.. किस हालत में है,



मृतक पूरन के परिवार में उसकी पत्नी- सुनीता 40 वर्ष, पुत्री- रेखा 20 वर्ष, पुत्री – गुड़िया 12 वर्ष, पुत्री- हेमलता 6 वर्ष व सबसे छोटा पुत्र- छत्रपाल जिसकी आयु 4 वर्ष है,  
हमने पूरन के परिवार से बात की तो उन्होंने बताया कि 30 अगस्त की शाम को पूरन घर से दक्षिण की ओर खेतों में अचानक ही बिना कुछ बताये चला गया था, फिर खबर आयी की उसने पेड़ पर अपने गमछे का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली है, 
यह सुनते ही परिवार व आस पड़ोस में चीख पुकार मच गयी, पूरन की मौत हो चुकी थी,




परिवारीजनों का कहना है कि अपने बच्चों को भरपेट खाना मुहैया न करापाने के चलते पूरन अक्सर डिप्रेशन में रहता था, वह दिहाड़ी मजदूरी का काम करता था, कभी काम मिलता था तो कभी काम नहीं भी मिलता था,
जब वह 10 साल का था तभी उसके पिता हुकुम सिंह कि मौत हो गयी थी, घर परिवार की जिम्मेदारियां उस पर बचपन से ही आ गयीं थीं, बीते दो वर्ष पूर्व उसकी मां रामकली सड़क दुर्घटना में घायल हो गयीं थीं... जिनके इलाज के लिए पूरन ने अपने हिस्से का घर भी बेच दिया... और अपने भाई छोटेलाल के घर में रहने लगा, इतने त्याग के बावजूद भी वह अपनी मां को बचा नहीं सका, मां की मौत के कुछ महीनों बाद ही उसने अपनी बड़ी बेटी रेखा की शादी भी कर दी,
मां के इलाज और बेटी की शादी के चलते पूरन पर अच्छा ख़ासा कर्ज हो चुका था, उसकी दिहाड़ी मजदूरी से जो कुछ मिलता वह कर्ज चुकाने में चला जाता, बच्चों के पालन पोषण के लिए अब उसके पास एक फूटी कौड़ी नहीं थी,




हमने इस पीड़ित परिवार का राशन कार्ड देखा तो पता लगा कि वह भी पूरन की माता रामकली के नाम पर था, जिसमें रामकली का एक बड़ा परिवार दर्ज तो था लेकिन उससे मिलने वाले अन्न की मात्रा से 4 परिवारों को जिन्दा रखना नामुमकिन था, दरससल पूरन और उसकी पत्नी के नाम पर अलग से कोई राशन कार्ड नहीं था,
इन सब हालातों के बीच पूरन लगातार डिप्रेशन में रहने लगा और एक दिन उसने मौत को गले लगा लिया,




पूरन की मौत समूचे सिस्टम और सभ्रांत समाज के मुंह पर एक करारा तमाचा है,
पूरन की आत्मा की शांति और उसके परिवार को जिन्दा रखने के लिए हम सब लोगों को मिलकर आर्थिक सहायतार्थ आगे आना चाहिए......





कासगंज से हम सभी पत्रकार मित्र आप सभी से यह अनुरोध करते हैं कि मृतक पूरन की पत्नी सुनीता (SUNEETA) के भारतीय स्टेट बैंक (SBI) बिलराम पर जारी बचत खाता संख्या A/C NO : 37060076861, IFSC CODE : SBIN0011632, में यथा संभव आर्थिक सहायता दान करने की कृपा करें,
       

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