हज़ारों चीखें न निकलें उससे पहले इसकी कराह सुन ली जाए तो बेहतर है,





(अमित तिवारी) कासगंज: कुछ इंसान अपने क्षुद्र लाभ के लिए किसी भी अमूल्य बस्तु जीव प्रकृति पर्यावरण स्थान संपत्ति व ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने से भी गुरेज नहीं करते,  इसी इंसानी जिद और उसके अतिक्रमण के कारण कासगंज की ऐतिहासिक धरोहर नदरई एक्वाडक्ट अर्थात जलसेतु जो अब दिन प्रतिदिन जर्जर होता जा रहा है, इसके जर्जर होने की बजह इसके ऊपर से गुजरने बाला भारी यातायात है.... जो तमाम बंदिशों के बावजूद आज तक नहीं रोका जा सका, अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि दुनियाभर में चर्चित कासगंज की यह ऐतिहासिक धरोहर  बेहद खतरे में है, अगर किसी भी कारण से यह एक्वाडक्ट अचानक टूटता होता है तो एक साथ हज़ारों लोगों के मरने की आशंका रहेगी, इसे रोकने के लिए हमें एहतियातन नदरई एक्वाडक्ट के ऊपर से गुजरने बाले यातायात को तत्काल प्रतिबंधित करना होगा,
इस संरचना की यथास्थिति जानने के लिए Structure Stability Survey कराना अनिवार्य हो चला है,
कासगंज के पूर्व जिलाधिकारी आरपी सिंह ने भी इस संदर्भ में संबंधित विभाग को एक नोटिस भेजा था, पर एक वर्ष के उपरांत भी इस एक्वाडक्ट    की सुरक्षा व संरक्षा को लेकर कोई ठोस नीति न बन सकी,



नदरई एक्वाडक्ट का तकनीकी आर्थिक व ऐतिहासिक महत्व:-
काली नदी के ऊपर बनाये गए इस एक्वाडक्ट अर्थात जलसेतु से होकर लोअर गंगा कैनाल गुजरती है,
इसकी गिनती विश्व के शीर्ष जलसेतु में होती है, यह 19 वीं शताब्दी की एक बहुउद्देशीय आर्थिक परियोजना थी जो सिंचाई व राजस्व अर्जन के प्रयोजन से बनाई गई थी,
वर्ष 1889 में आज से 130 साल पहले बनकर तैयार हुआ नदरई का यह एक्वाडक्ट अर्थात जलसेतु जो कि विश्व के तमाम शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम का हिस्सा है,  अमेरिका इंग्लैंड आयरलैंड की ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर इसकी एंटिक फ़ोटो 25-25 डॉलर तक में बिकती हैं, आयरलैंड की कॉर्क यूनिवर्सिटी से  इंजीनियरिंग में स्नातक विलियम गुड ने इसके निर्माण  में अहम भूमिका निभाई थी,
विलियम गुड इस परियोजना के कार्यकारी अभियंता थे,
60 फ़ीट चौड़ाई की कुल 15 त्रिजायें, जलसेतु की कुल लंबाई 1310 फ़ीट और ऊंचाई 88 फीट है,

यह जलसेतु 19 वीं शताब्दी में विश्वभर के अखवारों की सुर्खियां रहा, अमेरिका के केलिफोर्निया में 16 जनवरी 1892 को पेसिफिक रूरल प्रेस अखवार के मुख्य पृष्ठ पर कासगंज नदरई के इस एक्वाडक्ट जलसेतु की खबर छपी थी, उस दौर में इस जलसेतु निर्माण की चर्चा विश्वभर के सभी प्रमुख अखवारों में थी, नदरई का यह जल सेतु इंजीनियरिंग की एक ऐसी अग्रणी संरचना है जिसकी पुनरावृत्ति करना आज के मशीनी युग में भी किसी चैलेंज से कम नहीं है,

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