(अमित तिवारी) : फोरलेन में दफ़न हो गई लाखा की विरासत- 16 वीं शताब्दी का एक जल देवता जिसने वृन्दावन से सोरों तक खुदवाये दर्जनों कुएं,





कासगंज सोरों जी के बीच फोरलेन सड़क निर्माण के लिए चौड़ीकरण किया जा रहा है, इस चौड़ीकरण के चलते कई दुकान भवन को ढहाया गया व हज़ारों पेड़ों को काटना पड़ा है, वहीं कुछ ऐतिहासिक विरासत को भी ढहाने की बात सामने आई है,
कासगंज सोरों जी के बीच हमें अक्सर कुछ प्राचीन कुएं नज़र आते थे, जो अब नहीं दिखते, उन कुओं का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म हो गया है, दरअसल सड़क चौड़ीकरण के चलते लाखा बंजारा की ऐतिहासिक विरासत को दफन कर दिया गया है, ये वही लाखा बंजारा है जिसे 16 वीं शताब्दी में जल देवता कहा जाता था, लाखा बंजारा उस दौर में भारत का सबसे बड़ा ट्रांसपोर्टर था, बताया जाता है कि उसके काफिले में 10 हज़ार बैलगाड़ी और 20 हज़ार बैल शामिल थे,
लाखा  जहां भी जाता... तालाब खुदवाता... कुएं  खुदवाता, उसने देशभर में सैकड़ों तालाब और हज़ारों कुएं खुदवाये, इसी श्रखंला में लाखा बंजारा ने अपनी एक धार्मिक यात्रा के दौरान वृन्दावन से लेकर सोरों तक दर्जनों कुएं खुदवाये जो चंद दिनों पहले तक अपने सम्पूर्ण अस्तित्व के साथ खड़े थे पर सड़क चौड़ीकरण के चलते अब पूरी तरह दफन हो चुके हैं,


हज़ारों वर्षों में कहीं एक लाखा बंजारा जैसे लोक नायक जन्म लेते हैं जो अपने सामाजिक कार्यों के लिए सदियों तक लोक कथाओं और जनुश्रुतियों के जरिये हमारे सामाज के बीच एक नजीर बनकर लोगों के दिलों में स सम्मान राज करते हैं, 16 वीं शताब्दी में लाखा बंजारा नाम के इस ट्रांसपोर्टर ने लोगों की सहूलियत के लिए भारत भर में अपने व्यापारिक और धार्मिक देशाटन के दौरान सेकड़ों तालाब व हजारों कुएं खुदवाए, लाखा बंजारा के नाम से कई लघु चित्रकथाएं हमारे बीच प्रचिलित हैं, उस दौर में लाखा के पास 20 हज़ार बैल और 10 हज़ार बैल गाड़ियां थीं जिनका उपयोग वह जरूरी सामग्री के ट्रांसपोर्टेशन में होता था, जगह जगह तालाब और कुएं खुदवाने के पीछे लाखा का एक और उद्देश्य यह भी था कि व्यापारिक मार्गों में कुएं खुदवाने से उसके बैल और कर्मचारियों को आसानी से पेयजल आपूर्ति होती रहे, उस दौर में लोग लाखा बंजारा को एक ट्रांसपोर्टर के साथ साथ जलदेवता के तौर भी जाना जाता था, दिल्ली से लेकर बुंदेलखंड और सागर जिले तक लाखा बंजारे के द्वारा बनवाए गए हजारों जल स्रोत व जल संग्रह आज भी लोगों की जीवन दायिनी बने हुए हैं,
कहा जाता है कि वृन्दावन से सोरों जी की तीर्थ यात्रा के दौरान लाखा बंजारा ने दर्जनों तालाब और सैकड़ों कुएं खुदवाए, लाखा बंजारा के द्वारा खुदवाए गए कुएं जो सोरों जी प्रहलादपुर नगला खंजी के आस पास मौजूद कुएं जो चारलेन सड़क चौड़ीकरण में दफन हो चुके हैं,


कभी यह कुएं पिछले 4 सौ वर्षों से राहगीरों व सोरों जी को आने वाले तीर्थ यात्रियों की प्यास बुझाते रहे थे,  इन कुओं की बेजोड़ वास्तुकला को देखकर ये कहा जा सकता था कि उस दौर में इनका निर्माण किसी महापरियोजना से कम नहीं था,
एक एक कुएं में सैकड़ों टन शिल्पित पत्थर व एक एक लाख तक की संख्या में ककईया ईंट चुनी गई थी,  हमें बेहद अफसोस है कि यह एक और ऐतिहासिक धरोहर अब लुप्त हो चुकी है।

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