(अमित तिवारी) कासगंज: घुटने वाली हैं सांसें- एक पेड़ पर 300 जिंदगियों का जिम्मा



कासगंज: घुटने वाली हैं सांसें- एक पेड़ पर 300 जिंदगियों का जिम्मा,


हम प्रकृति से छेड़छाड़ कर मानव जीवन के अस्तित्व को संकट में डाल रहे हैंहर साल धरती से ऑक्सीजन स्तर घटता जा रहा हैधरती पर मशीनी युग की शुरुआत से लेकर अब तक ऑक्सीजन का स्तर 35 फीसदी से घटकर 21 फीसदी ही रह गया हैजिंदगी की भागदौड़ में शायद आपको पता ही नहीं होगा कि आने वाले दिनों में कासगंज शहर की सांसें किस तरह से घुटने वाली हैंजिस लिहाज से शहर को शुद्ध हवा व ऑक्सीजन चाहिए.... जो अब नहीं बची हैघटते पेड़... बढ़ती घनी आबादी... घर घर से वातानुकूलित संयत्रों का तापोत्सर्जन... लगातार बढ़ता कार्बन उत्सर्जन और कुंज गलियों से भरी बेतुकी टाउन प्लानिंग के चलते कासगंज शहर के लोग शुद्ध हवा व ऑक्सीजन को तरसना शुरू हो गए हैंबाहरी इलाकों के अनुपात में शहर का तापमान भी 5 से 7 डिग्री अधिक रहता है




शहर कासगंज की बसावट जो कि हमारे बुजुर्गों की दूरदर्शिता को नहीं दर्शातीघनी आबादी और कुंज गलियों के इस शहर में पेड़ों का तो नामोनिशान ही नहीं हैजो कुछ पेड़ बचे हैं वह सिर्फ शहर के बाहरी इलाकों में ही स्थित हैंएक अनुमान के मुताबिक कासगंज शहर में अब 400 के आसपास ही पेड़ बचे हैंअर्थात जहां प्रति जिंदगी 2 पेड़ों की अनिवार्यता है वहां 1 पेड़ पर 300 से अधिक जिंदगियों का जिम्मा हैये आंकड़े बेहद निराशाजनक हैंमनुष्य को जीवित रहने के लिए प्रतिदिन 350 से 550 लीटर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, 1 स्वस्थ पेड़ प्रति दिन लगभग 230 लीटर ऑक्सीजन ही छोड़ता हैमौजूदा आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन कासगंज शहर के लोगों को 4.37 करोड़ लीटर ऑक्सीजन चाहिए पर शहर में मौजूदा पेड़ों से प्रतिदिन सिर्फ 92 हज़ार लीटर ऑक्सीजन ही उत्सर्जित हो रही हैबांकी ऑक्सीजन पूर्ति हवा के बहाव के साथ से शहर में दाखिल होती है जो एक अपर्याप्त मात्रा है,






कासगंज शहर की अनुमानित आबादी 1.25 लाख के आसपास हैवर्तमान और भविष्य की अवश्याताओं के लिहाज से कासगंज शहर को 2.5 लाख से अधिक पेड़ों की जरुरत है1.25 लाख की आबादी वाला कासगंज शहरी क्षेत्र लगभग 483 हेक्टेयर में फैला हुआ हैएक अनुमान के मुताबिक जिसमें से 386 हेक्टेयर क्षेत्र कंक्रीट की संरचनाओं से ढका हुआ है और महज 97 हेक्टेयर क्षेत्र ही जो कि सड़क खेल मैदान वाहन पार्क व हरित पार्क के लिए बचा हैविशेषज्ञों की मानें तो घर मकानों के अलावा इस शहर का 193 हेक्टेयर भूभाग सड़क खेल मैदान वाहन पार्क व हरित पार्क के लिए अरक्षित होना चाहिए थाजिसमें से 10 फीसदी हिस्सा अर्थात 48 हेक्टेयर भूभाग सिर्फ पेड़ों के लिए आरक्षित होना चाहिए था पर ऐसा नहीं है,





अगर 5 सेकंड के लिए धरती से ऑक्सीजन गायब हो जाये तो क्या होगा – 5 सेकंड के लिए धरती बहुत ठंडी हो जाएगीजितने भी लोग समुद्र किनारे लेटे है उन्हें तुरंत सनबर्न होने लगेगादिन में भी अंधेरा छा जाएगा,हर वह इंजन रुक जाएगा जिनमें आंतरिक दहन होता हैरनवे पर टेक ऑफ कर चुका प्लेन वहीँ क्रैश हो जायेगाधातुओं के टुकड़े बिना वैल्डिंग के ही आपस में जुड़ जायेंगेऑक्सीजन न होने का यह बहुत ही भयानक साइड इफेक्ट होगा,
पूरी दुनिया में सबके कानों के पर्दे फट जाएगे क्योंकि 21 फीसदी ऑक्सीजन के अचानक लुप्त होने से हवा का दबाब घट जाएगासभी का बहरा होना पक्का हैकंक्रीट से बनी हर बिल्डिंग ढेर हो जाएगीहर जीवित कोशिका फूलकर फूट जाएगीपानी में अधिकतर ऑक्सीज़न होती है... ऑक्सीजन ना होने पर हाइड्रोजन गैसीय अवस्था में आ जाएगी और इसका वॉल्यूम बढ़ जाएगा.. हमारी साँसे बाद में रूकेगी... हम फूलकर पहले ही फट जाएँगेसमुद्र का सारा पानी भाप बनकर उड़ जाएगाक्योंकि बिना ऑक्सीजन के पानी हाइड्रोजन गैस में बदल जाएगा और यह सबसे हल्की गैस होती है तो इसका अंतरिक्ष में उड़ना लाज़िमी हैऑक्सीजन के अचानक गायब होने से हमारे पैरों तले की जमीन खिसककर 10 से 15 किलोमीटर नीचे चली जाएगी,






जनपद कासगंज के डीएफओ दिवाकर वशिष्ठ  कहते हैं कि 1 स्वस्थ पेड़ 2 लोगों को ऑक्सीजन देने के लिए पर्याप्त हैआबादी के लिहाज से कासगंज शहर को तक़रीबन 60 हज़ार से अधिक स्वस्थ पेड़ चाहिए लेकिन इस घनी बसावट वाले शहर में नए पेड़ लगाने के लिए कोई खाली जगह ही नहीं है,
डीएफओ दिवाकर वशिष्ठ ने बताया कि आवास विकास कॉलोनी के पार्कों में इस बार 5.5 हज़ार नए पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया हैवहीँ पूरे जनपद कासगंज में विभिन्न विभागों के सहयोग से 15 लाख नए पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित है जिसमें से 3.90 लाख नए पेड़ अकेले फोरेस्ट विभाग लगाएगाइस बार उक्त सभी नए पेड़ों की ज्योटेगिंग भी होगीइसके लिए फोरेस्ट विभाग ने एक एंड्राइड एप्लीकेशन भी तैयार की है,





कासगंज के बरिष्ठ चिकित्सक डॉ आशीष गुप्ता  कहते हैं कि बिना पेड़ों के घनी बसावट और घनी आबादी वाले इस शहर कासगंज में रहना दम घुटने जैसा हैजिंदा रहने के लिए शुद्ध हवा/ऑक्सीजन बहुत जरूरी हैलेकिन अगर हमें ऑक्सीजन पर्याप्त  मात्रा में नहीं मिल रहा है तो इसके कारण शुरू में सफोकेशन होता हैवातावरण में शुद्ध हवा/ऑक्सीजन कम होने कारण हाइपोक्सिया रोग की स्थिति होती है, जिससे सरदर्दउलझनबेचैनीसांस लेने की दर असंतुलनरक्ताल्पतातीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम,  दमा मध्य फेफड़ों के रोग फुफ्फुसीय शोथहृदय रोग आदि की संभावना बढ़ जाती हैऑक्सीजन अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है ये सभी जानते हैलेकिन अच्छी बात ये है कि कई मेडिकल कंडीसन में हाइपरबेरिक ऑक्सीजन बहुत अच्छा स्वास्थ्य लाभ भी देती है,

Comments

webmedia.page

साइकिल से ही यूरोप अफ्रीका व अरब देशों को पार कर सोरों जी पहुंचे रूसी यात्री मिखायू,

गंगा एक्सप्रेसवे बनने से कासगंज की तराई हो सकती है आर्थिक गलियारे के रूप में विकसित।

कासगंज: वेस्ट सेल्फी इन द वर्ल्ड - छोटे शहर से इंटरनेशनल स्टार्टअप।

सोरों जी के संदर्भ में उद्योगपति रामगोपाल दुबे ने की राष्ट्रपति से मुलाकात, अब अगली मुलाकात में भी सोरों जी के सर्वांगीण विकास को लेकर होनी है विस्तृत चर्चा।

हज़ारों चीखें न निकलें उससे पहले इसकी कराह सुन ली जाए तो बेहतर है,

कासगंज के आरके मिश्रा ने डिजाइन किया था तेजस का कॉकपिट- दशकों बाद अब वायुसेना में शामिल हुआ भारत का यह पहला लड़ाकू विमान,

कासगंज : ग्यारवीं के छात्रों द्वारा बनाई साइकिल दे रही है 50 का माइलेज।