(अमित तिवारी) कासगंज : क्रांतिकारी महावीर सिंह राठौर की आज पुण्य तिथि है, 17 मई 1933 को सरदार भगत सिंह के सहयोगी रहे कासगंज के इस वीर सपूत की अंडमान निकोबार जेल में भूंख हड़ताल के दौरान मृत्यु हो गयी थी,



अंडमान निकोबार द्वीप पर सेल्ल्यूलर जेल परिसर में स्थापित महावीर सिंह राठौर की प्रतिमा



क्रांतिकारी महावीर सिंह राठौर की आज पुण्य तिथि है, 17 मई 1933 को सरदार भगत सिंह के सहयोगी व कासगंज के वीर सपूत की अंडमान निकोबार जेल में भूंख हड़ताल के दौरान मृत्यु हो गयी थी
वतन परस्तों की ये बस्ती है इनकी सेवा वतन परस्ती है, 17 मई 1933 को भगत सिंह के सहयोगी व कासगंज के वीर सपूत महावीर सिंह की अंडमान निकोबार जेल में भूंख हड़ताल के दौरान मृत्यु हुयी थी,  

आज़ादी की जंग में जनपद कासगंज के निवासी क्रांतिकारी महावीर सिंह राठौर जो कि उन दिनों गदर आंदोलन और हिंदुस्तान सोशल रिपब्लिकन आर्मी के एक वीर सिपाही जाने जाते थे, उनकी बहादुरी और उनके बलिदान को ये इतिहास हमेशा याद रखेगा।


अमर बलिदानी महावीर सिंह राठौर का जन्म 16 सितम्बर 1904 को कासगंज जिले के शाहपुर टहला नामक एक छोटे से गांव में हुआ था! 
यह गांव कासगंज से पूर्व की ओर कासगंज व एटा जिले की सीमा पर स्थित है!

सन 1922 का एक वाकया है.. एक दिन अंग्रेज अधिकारियों ने अपनी राजभक्ति प्रदर्शित करने के उद्देश्य से कासगंज में अमन सभा का आयोजन किया, जिसमें ज़िलाधीश, पुलिस कप्तान, स्कूलों के इंस्पेक्टर, आस -पड़ोस के अमीर -उमरा आदि जमा हुए| छोटे -छोटे बच्चो को भी जबरदस्ती ले जाकर सभा में बिठाया गया, जिनमें से एक महावीर सिंह भी थे। लोग बारी -बारी उठकर अंग्रेजी हुक़ूमत की तारीफ़ में लम्बे -लम्बे भाषण दे ही रहे थे कि तभी बच्चों के बीच से किसी ने जोर से से नारा लगायामहात्मा गांधी की जय। बाकी लड़कों ने भी समवेत स्वर में ऊँचे कंठ से इसका समर्थन किया और पूरा वातावरण इस नारे से गूँज उठा। देखते -देखते गांधी विरोधियों की वह सभा गांधी की जय जयकार के नारों से गूँज उठी, लिहाजा अधिकारी तिलमिला उठे। प्रकरण की जांच के फलस्वरूप महावीर सिंह को विद्रोही बालकों का नेता घोषित कर सजा दी गयी पर इसने उनमें बगावत की भावना को और प्रबल कर दिया।

बड़े होकर महावीर जी भगतसिंह राजगुरु व सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों के संपर्क में आगये थे,

सन 1829 में दिल्ली असेंबली में बम फेंकने व सांडर्स की हत्या के बाद भगत बटुकेश्वर दत्त राजगुरु सुखदेव के साथ महावीर सिंह को भी हिरासत में ले लिया गया! और मुक़दमे की सुनवाई के लिए लाहौर भेज दिया गया,

महावीर सिंह राठौर की फ़ाइल फोटो


मुकदमा समाप्त हो जाने पर  सांडर्स की हत्या में भगत सिंह की सहायता करने के अभियोग में महावीर सिंह को उनके सात अन्य साथियो के साथ आजन्म कारावास का दंड दिया गया। भगतसिंह राजगुरु सुखदेव व अन्य क्रांतिकारियों के साथ साथ महावीर सिंह राठौर भी 40 दिनों तक जेल के अंदर ही भूंख हड़ताल पर बैठे रहे। सजा के बाद कुछ दिनों तक पंजाब की जेलों में रखकर बाकी लोगो को (भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और किशोरी लाल के अतिरिक्त  मद्रास प्रांत की विभिन्न जेलों में भेज दिया गया| महावीर सिंह और गयाप्रसाद को बेलोरी सेंट्रल जेल ले जाया गया, जहाँ से जनवरी 1933 में उन्हें उनके कुछ साथियो के साथ अंडमान निकोबार द्वीप पर काला पानी की सज़ा के लिए भेज दिया गया
अंडमान निकोबार द्वीप पर सेल्ल्यूलर जेल में काला पानी की सज़ा काट रहे कासगंज के इस लाल ने भूंख हड़ताल कर दी, अंग्रेजों ने भूंख हड़ताल तुडवाने के लिए महावीर सिंह के मुंह में जबरन दूध डालने का प्रयास किया, महावीर सिंह के प्रतिरोध के कारण दूध उनके फेंफडों में चला गया जिसके कारण 17 मई 1933 को कासगंज के इस वीर सपूत महावीर सिंह की मृत्यु हुयी हो गयी,  अंग्रेजों ने उनके शव को पत्थरों से बांधकर समन्दर में फेंक दिया,

उनकी मृत्यु के पश्चात् उनके कपड़ों से उनके पिता का एक पत्र मिला, जिसमें लिखा था  कि "बेटे देश भर से तमाम हीरों को चुनचुनकर वहां इकट्ठा किया गया है.. उन हीरों में से तुम भी एक नायाब हीरा हो" मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है!

हम सब भारत मां के इस वीर सपूत को नमन कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं,

“भारत माता की जय” 


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