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Showing posts from May, 2019

(अमित तिवारी) कासगंज : एक बार फिर... राजू का राजतिलक, पहले स्थान पर बीजेपी दूसरे पर महागठबंधन और चौथे स्थान पर रहा नोटा,

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एक बार फिर... राजू का राजतिलक,  पहले स्थान पर बीजेपी दूसरे पर महागठबंधन और चौथे स्थान पर रहा नोटा,

(अमित तिवारी) कासगंज : एटा कासगंज लोकसभा सीट पर जनता ने एक फिर से बीजेपी प्रत्याशी राजवीर सिंह राजू भैया का राजतिलक कर दिया है, मतगणना के पहले चरण से ही बीजेपी प्रत्याशी राजू भैया ने जो वोटों की बढ़त पकड़ी वह निरंतर बढ़त के साथ जारी रही और अंततः बीजेपी प्रत्याशी राजू भैया ने महागठबंधन प्रत्याशी देवेन्द्र सिंह यादव को 122670 मतों से परास्त कर दिया,



एटा कासगंज लोकसभा सीट पर मतदाताओं की की कुल संख्या 1617534 थी जिसमें से 1013386  मतदाताओं ने इस चुनाव में मतदान किया जिसका मतदान प्रतिशत 62.65 दर्ज हुआ, जिसमें से बीजेपी प्रत्याशी राजवीर सिंह राजू भैया को 54.56  प्रतिशत मत एवं सपा बसपा गठबंधन प्रत्याशी देवेन्द्र सिंह यादव को 42.28  प्रतिशत मत प्राप्त हुए,



निर्वाचन आयोग की अधिकृत वेबसाइट पर प्रदर्शित मतगणना परिणाम के अनुसार प्रथम स्थान पर रहे बीजेपी प्रत्याशी राजवीर सिंह राजू भैया को 545348 मत, दूसरे स्थान पर रहे महागठबंधन प्रत्याशी देवेन्द्र सिंह को 422678 मत, तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय प्रत्याशी…

(अमित तिवारी) कासगंज : क्रांतिकारी महावीर सिंह राठौर की आज पुण्य तिथि है, 17 मई 1933 को सरदार भगत सिंह के सहयोगी रहे कासगंज के इस वीर सपूत की अंडमान निकोबार जेल में भूंख हड़ताल के दौरान मृत्यु हो गयी थी,

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अंडमान निकोबार द्वीप पर सेल्ल्यूलर जेल परिसर में स्थापित महावीर सिंह राठौर की प्रतिमा


क्रांतिकारी महावीर सिंह राठौर की आज पुण्य तिथि है, 17 मई 1933 को सरदार भगत सिंह के सहयोगी व कासगंज के वीर सपूत की अंडमान निकोबार जेल में भूंख हड़ताल के दौरान मृत्यु हो गयी थी वतन परस्तों की ये बस्ती है इनकी सेवा वतन परस्ती है, 17 मई 1933 को भगत सिंह के सहयोगी व कासगंज के वीर सपूत महावीर सिंह की अंडमान निकोबार जेल में भूंख हड़ताल के दौरान मृत्यु हुयी थी,  
आज़ादी की जंग में जनपद कासगंज के निवासी क्रांतिकारी महावीर सिंह राठौर जो कि उन दिनों गदर आंदोलन और हिंदुस्तान सोशल रिपब्लिकन आर्मी के एक वीर सिपाही जाने जाते थे, उनकी बहादुरी और उनके बलिदान को ये इतिहास हमेशा याद रखेगा।

अमर बलिदानी महावीर सिंह राठौर का जन्म 16 सितम्बर 1904 को कासगंज जिले के शाहपुर टहला नामक एक छोटे से गांव में हुआ था! यह गांव कासगंज से पूर्व की ओर कासगंज व एटा जिले की सीमा पर स्थित है!
सन 1922 का एक वाकया है.. एक दिन अंग्रेज अधिकारियों ने अपनी राजभक्ति प्रदर्शित करने के उद्देश्य से कासगंज में अमन सभा का आयोजन किया, जिसमें ज़िलाधीश, पुलिस क…

(अमित तिवारी) कासगंज: घुटने वाली हैं सांसें- एक पेड़ पर 300 जिंदगियों का जिम्मा

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कासगंज: घुटने वाली हैं सांसें- एक पेड़ पर 300 जिंदगियों का जिम्मा,
हम प्रकृति से छेड़छाड़ कर मानव जीवन के अस्तित्व को संकट में डाल रहे हैं, हर साल धरती से ऑक्सीजन स्तर घटता जा रहा है, धरती पर मशीनी युग की शुरुआत से लेकर अब तक ऑक्सीजन का स्तर 35 फीसदी से घटकर 21 फीसदी ही रह गया है, जिंदगी की भागदौड़ में शायद आपको पता ही नहीं होगा कि आने वाले दिनों में कासगंज शहर की सांसें किस तरह से घुटने वाली हैं, जिस लिहाज से शहर को शुद्ध हवा व ऑक्सीजन चाहिए.... जो अब नहीं बची है, घटते पेड़... बढ़ती घनी आबादी... घर घर से वातानुकूलित संयत्रों का तापोत्सर्जन... लगातार बढ़ता कार्बन उत्सर्जन और कुंज गलियों से भरी बेतुकी टाउन प्लानिंग के चलते कासगंज शहर के लोग शुद्ध हवा व ऑक्सीजन को तरसना शुरू हो गए हैं, बाहरी इलाकों के अनुपात में शहर का तापमान भी 5 से 7 डिग्री अधिक रहता है, 




शहर कासगंज की बसावट जो कि हमारे बुजुर्गों की दूरदर्शिता को नहीं दर्शाती, घनी आबादी और कुंज गलियों के इस शहर में पेड़ों का तो नामोनिशान ही नहीं है, जो कुछ पेड़ बचे हैं वह सिर्फ शहर के बाहरी इलाकों में ही स्थित हैं, एक अनुमान के मुताबिक कासगंज …

(अमित तिवारी)- भगवान परुषराम का धनुष दान में लेकर पटियाली में अभ्यास करते थे गुरु द्रोणाचार्य।

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भगवान परुषराम का धनुष दान में लेकर पटियाली में अभ्यास करते थे गुरु द्रोणाचार्य।
(अमित तिवारी) पटियाली। पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार राजा द्रुपद और गुरु द्रोणाचार्य आपस में दोनों गुरु भाई व् बालसखा भी थे, शिक्षा दीक्षा ग्रहण करने के पश्चात द्रुपद तो अखंड पंचाल प्रदेश के राजा बन गए परन्तु गुरु द्रोणाचार्य अत्यंत गरीबी के दिन काट रहे थे, इस गरीबी के दौरान  ही गुरु द्रोणाचार्य का विवाह कृपाचार्य के बहन कृपी से हो गया था जिनसे एक पुत्र जनित हुआ जिसका नाम अश्वत्थामा था, गुरु द्रोणाचार्य की गरीबी के चलते कृपी अपने पुत्र अश्वत्थामा को लेकर अपने भाई कृपाचार्य के यहां कम्पिल पास स्थित गाँव कारब में ही रहा करतीं थीं। बाल अश्वत्थामा के अत्यधिक दुग्धपान के चलते कृपाचार्य ने द्रोणाचार्य से कहा कि वो अपने पुराने मित्र राज द्रुपद से कुछ गायें दान में ले आयें जिससे बाल अश्वत्थामा का पेट भरता रहे, इस सलाह पर द्रोणाचार्य और कृपाचार्य राजा द्रुपद के यहां पहुंचे और कहा कि वो उनके बालसखा हैं। राजा द्रुपद ने द्रोणाचार्य से कहा के एक राजा और एक निर्धन में कोई मित्रता नहीं होती। अपमानित होकर द्रोणाचार्य द्रु…

(अमित तिवारी): अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस - 21 वीं सदी का मजबूर “मजदूर”

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अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस - 21 वीं सदी का मजबूर “मजदूर”

किसी ने लिखा है कि ... नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बाद... रोटियां भी मयस्सर न हों जिसे काम के बाद, आज 1 मई को विश्वभर में प्रतिवर्ष की भांति पिछले 133 वर्षों से अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस का आयोजन हो रहा है, पहली बार अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस मनाने की शुरूआत1 मई 1886 से मानी जाती है जबअमेरिकाकी मज़दूर यूनियनों ने काम का समय 8 घंटे से अधिक न रखे जाने को लेकर हड़ताल की थी, मजदूर का नाम आते ही अक्सर लोग इंसान को लगातार काम करने वाली एक मशीन के स्वरुप में देखते है, मामूली मजदूरी में कड़ी शारीरिक मेहनत का नाम मजदूरी है जो उसके परिवार का भरण पोषण करने की मजबूरी है, मजबूरी का नाम मजदूरी है, शारीरिक मेहनत कर कमाना खाना कोई अभिशाप नहीं है परन्तु मेहनत का उचित मेहनताना न मिलना मजदूर के हितों की अनदेखी है, कम मेहनताने में निर्धारित समय से अधिक मेहनत करवाना भी मजदूर के हितों की अनदेखी है, दुर्घटना व मृत्यु के उपरांत अधिकतर मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा न मिलपाना भी मजदूर के हितों की अनदेखी है, भारत में मजदूरों के हितों को लेकर तमाम वैधानिक प्…