(अमित तिवारी): सोरों के वटुकनाथ मंदिर में स्थापित है देवी जया त्रिपुरसुंदरी की उपपीठ- आज से 12 सौ वर्ष पूर्व सतयुग कालीन गृद्धवट के नीचे आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी इस उपपीठ की स्थापना।



(अमित तिवारी): सोरों के वटुकनाथ मंदिर में स्थापित है देवी जया त्रिपुरसुंदरी की उपपीठ- आज से 12 सौ वर्ष पूर्व सतयुग कालीन गृद्धवट के नीचे आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी इस उपपीठ की स्थापना।

सोरों/कासगंज। सोरों स्थित वटुकनाथ मंदिर परिसर में देवी जया त्रिपुरसुंदरी की उपपीठ स्थापित है। इस उपपीठ की स्थापना आज से 12 सौ वर्ष पूर्व सतयुग कालीन गृद्धवट के नीचे आदि गुरु शंकराचार्य के द्वारा की गई थी। श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्त्रोत्र के अनुसार माता देवी दुर्गा भगवान् शिव की पत्नी माता पार्वती जी का ही स्वरुप हैं। सनातन धर्म में माता देवी दुर्गा को ब्रह्मांड की परम शक्ति के रूप में जाना जाता है। श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्त्रोत्र के अनुसार माता देवी दुर्गा के 108 स्वरूपों में देवी सती,  देवी साध्वी,  देवी भवप्रीता,  देवी भवानी,  देवी भवमोचनी,  देवी आर्या,  देवी दुर्गा  के पश्चात देवी जया त्रिपुरसुंदरी 8 वें खंड में वर्णित हैं जिनकी उपपीठ सोरों जी शूकर क्षेत्र के वटुकनाथ मंदिर में स्थापित है। वटुकनाथ मंदिर के महंत श्री मुन्ना लाल जी के अनुसार देवी जयात्रिपुर सुंदरी की यह उपपीठ आदि गुरु शंकराचार्य के द्वारा आज से 12 सौ वर्ष पूर्व स्थापित की गयी थी। इससे पूर्व इस मंदिर परिसर में सतयुग काल से ही गृद्धवट उपस्थित था जिसके नीचे वेद पुराण उपनिषदों की रचना हुयी थी। जया देवी त्रिपुरसुन्दरी से सम्बंधित एक अनुश्रुति है कि एक बार  पार्वती जी ने भगवान शिवजी से पूछा हे भगवन आपके द्वारा वर्णित तंत्र  शास्त्र की साधना से जीव के आधि व्याधि शोक संताप दीनता हीनता तो दूर हो जाएगी किन्तु गर्भवास और मरण के असह्य दुख की निवृत्ति और मोक्ष पद की प्राप्ति का कोई सरल उपाय बताइये तब  पार्वती जी के अनुरोध पर भगवान शिव ने जया देवी त्रिपुरसुन्दरी श्रीविद्या साधना प्रणाली को प्रकट किया। श्री यंत्र साधना का संबंध भी त्रिपुर सुंदरी देवी से ही है,  इसीलिए ही वटुकनाथ मंदिर में आदि श्री यंत्र स्थापित है, दुख की निवृत्ति और मोक्ष पद प्राप्ति की कामना के लिए समस्त भारतवर्ष से हज़ारों लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष यहाँ आते हैं।

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