(अमित तिवारी): 108 श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्त्रोत्र के 41 वें खंड वर्णित है पटियाली की पाटलावती देवी शक्ति पीठ।

-108 श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्त्रोत्र के 41 वें खंड वर्णित है पटियाली की पाटलावती देवी शक्ति पीठ।

-देवी दुर्गा के 108 स्वरूपों में से एक हैं पटियाली     स्थित माता पाटलावती देवी 

-अखंड पांचाल प्रदेश के राजा द्रुपद की कुल देवी   मानीं जातीं हैं माता पाटलावती।

-गुरु द्रोणाचार्य ने भी की थी इस पाटलावती देवी   मंदिर में अखंड साधना।

-समूचे विश्व में सिर्फ एक पटियाली में ही स्थापित है   माता पाटलावती देवी का मंदिर।






(अमित तिवारी) पटियाली/कासगंज। आज से हज़ारों वर्ष पूर्व द्वापरयुग में पटियाली पांचाल प्रदेश का एक बड़ा प्रशासनिक केंद्र था। लेकिन उससे पूर्व भी पटियाली के पश्चिमी भाग में श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्त्रोत्र के अनुसार 41 वें खंड में अनुश्रति माता पाटलावती देवी का मंदिर स्थापित था। माना जाता है कि द्वापरयुग में माता पाटलावती देवी अखंड पांचाल प्रदेश के राजाद्रुपद की भी कुल देवी रहीं थीं और वहीँ गुरु द्रोणाचार्य ने भी पटियाली के इसी माता पाटलावती देवी मंदिर में घोर साधना की थी। अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार समूचे विश्व में सिर्फ एक पटियाली में ही माता पाटलावती देवी का मंदिर स्थापित है।
 श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्त्रोत्र के अनुसार माता देवी दुर्गा भगवान् शिव की पत्नी माता पार्वती जी का ही स्वरुप हैं सनातन धर्म में माता देवी दुर्गा को ब्रह्मांड की परम शक्ति के रूप में जाना जाता है श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्त्रोत्र के अनुसार माता देवी दुर्गा के 108 स्वरूपों में
सतीसाध्वीभवप्रीताभवानीभवमोचनीआर्यादुर्गाजयाआद्यात्रिनेत्राशूलधारिणीपिनाकधारिणीचित्राचंद्रघंटामहातपाबुद्धि,अहंकाराचित्तरूपाचिताचितिसर्वमंत्रमयीसत्तासत्यानंदस्वरुपिणीअनंताभाविनीभव्याअभव्यासदागतिशाम्भवीदेवमाता,चिंतारत्नप्रियासर्वविद्यादक्षकन्यादक्षयज्ञविनाशिनीअपर्णाअनेकवर्णापाटलापाटलावतीपट्टाम्बरपरिधानाकलमंजरीरंजिनी,अमेयविक्रमाक्रूरासुन्दरीसुरसुन्दरीवनदुर्गामातंगीमतंगमुनिपूजिताब्राह्मीमाहेश्वरीएंद्रीकौमारीवैष्णवीचामुंडावाराहीलक्ष्मी,पुरुषाकृतिविमलाउत्कर्षिनीज्ञानाक्रियानित्याबुद्धिदाबहुलाबहुलप्रियासर्ववाहनवाहनानिशुंभशुंभहननीमहिषासुरमर्दिनी,मधुकैटभहंत्रीचंडमुंडविनाशिनीसर्वसुरविनाशासर्वदानवघातिनीसर्वशास्त्रमयीसत्यासर्वास्त्रधारिनीअनेकशस्त्रहस्ता,अनेकास्त्रधारिनीकुमारीएककन्याकैशोरीयुवतीयतिअप्रौढ़ाप्रौढ़ावृद्धमाताबलप्रदामहोदरीमुक्तकेशीघोररूपामहाबला,अग्निज्वालारौद्रमुखीकालरात्रितपस्विनीनारायणीभद्रकालीविष्णुमायाजलोदरीशिवदुतीकरालीअनंतापरमेश्वरीकात्यायनी,सावित्रीप्रत्यक्षाब्रह्मावादिनी देवियों के नाम वर्णित हैं इनमें से 41 वें खंड में माता देवी पाटलावती का नाम अनुश्रति है जिसका अर्थ है गुलाब के फूल या लाल परिधान या फूल धारण करने वाली देवी
मंदिर के महंत श्री रघुवर दास का कहना है कि माता पाटलावती देवी के मंदिर में लाल गुलाब के फूल व् लाल वस्त्र अर्पित करने का बिधान है, ऐसा करने से मां पाटलावती देवी प्रसन्न होतीं हैं। द्वापरयुग में द्रौपदी ने अपनी पहली मंगला आरती इसी मंदिर में की थी।
श्रद्धालु प्रभा मिश्रा का कहना है कि पटियाली का माता पाटलावती देवी मंदिर द्वापरयुग में राजा द्रुपद व् द्रोणाचार्य की कुल देवी के रूप में विद्यमान रहा है, मंदिर के पूर्व महंतों का दाबा रहा है कि महाभारत का एक मात्र अमरपात्र अश्वत्थामा भी यदाकदा इस मंदिर में माता पाटलावती देवी के दर्शन को आता रहा है।

इनसाइड:
जनपद कासगंज स्थित देवियों के अन्य प्रमुख मंदिर
कासगंज जनपद में आदि शक्ति देवियों के अन्य मंदिरों में कासगंज शहर में स्थित मां चामुंडा देवी मंदिर, सोरों जी में वटुकनाथ मंदिर स्थित माता जया त्रिपुर सुंदरी, भोगपुर वाली काली माता, ब्रह्म्पुरी स्थित काली माता मंदिर, सहावर स्थित गमा देवी मंदिर, सिढ्पुरा स्थित मां काली मंदिर का नाम प्रमुखता से आता है

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