भगत सिंह के साथ सांडर्स की हत्या में शामिल थे कासगंज के महावीर सिंह राठौर, भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी तो महावीर सिंह को मिली कालापानी की सज़ा,

भगत सिंह के साथ सांडर्स की हत्या में शामिल थे कासगंज के महावीर सिंह राठौर, भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी तो महावीर सिंह को मिली कालापानी की सज़ा,


(अमित कुमार तिवारी) कासगंज।  वतन परस्तों की ये बस्ती है इनकी सेवा वतन परस्ती है, आज़ादी की जंग में जनपद कासगंज के निवासी क्रांतिकारी महावीर सिंह राठौर जो कि उन दिनों गदर आंदोलन और हिंदुस्तान सोशल रिपब्लिकन आर्मी के एक वीर सिपाही जाने जाते थे, उनकी बहादुरी और उनके बलिदान को ये इतिहास हमेशा याद रखेगा, आज़ादी की इस जंग में कासगंज के महावीर सिंह राठौर अपने मित्र भगत सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे, महावीर सिंह राठौर भगत सिंह के साथ सांडर्स की हत्या में शामिल थे, भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सज़ा हुई तो महावीर सिंह राठौर को कालापानी की सज़ा,

अमर बलिदानी महावीर सिंह राठौर का जन्म 16 सितम्बर 1904 को कासगंज जिले के शाहपुर टहला नामक एक छोटे से गांव में हुआ था, 
यह गांव कासगंज से पूर्व की ओर कासगंज व एटा जिले की सीमा पर स्थित है,
सन 1922 का एक वाकया है.. एक दिन अंग्रेज अधिकारियों ने अपनी राजभक्ति प्रदर्शित करने के उद्देश्य से कासगंज में अमन सभा का आयोजन किया, जिसमें ज़िलाधीश, पुलिस कप्तान, स्कूलों के इंस्पेक्टर, आस -पड़ोस के अमीर -उमरा आदि जमा हुए,  छोटे -छोटे बच्चो को भी जबरदस्ती ले जाकर सभा में बिठाया गया, जिनमें से एक महावीर सिंह भी थे, लोग बारी -बारी उठकर अंग्रेजी हुक़ूमत की तारीफ़ में लम्बे -लम्बे भाषण दे ही रहे थे कि तभी बच्चों के बीच से किसी ने जोर से से नारा लगाया–महात्मा गांधी की जय,  बाकी लड़कों ने भी समवेत स्वर में ऊँचे कंठ से इसका समर्थन किया और पूरा वातावरण इस नारे से गूँज उठा, देखते -देखते गांधी विरोधियों की वह सभा गांधी की जय जयकार के नारों से गूँज उठी, लिहाजा अधिकारी तिलमिला उठे। प्रकरण की जांच के फलस्वरूप महावीर सिंह को विद्रोही बालकों का नेता घोषित कर सजा दी गयी पर इसने उनमें बगावत की भावना को और प्रबल कर दिया।

बड़े होकर महावीर जी भगतसिंह राजगुरु व सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों के संपर्क में आगये थे,

सन 1829 में दिल्ली असेंबली में बम फेंकने व सांडर्स की हत्या के बाद भगत बटुकेश्वर दत्त राजगुरु सुखदेव के साथ महावीर सिंह को भी हिरासत में ले लिया गया! और मुक़दमे की सुनवाई के लिए लाहौर भेज दिया गया!,

मुकदमा समाप्त हो जाने पर  सांडर्स की हत्या में भगत सिंह की सहायता करने के अभियोग में महावीर सिंह को उनके सात अन्य साथियो के साथ आजन्म कारावास का दंड दिया गया, भगतसिंह राजगुरु सुखदेव व अन्य क्रांतिकारियों के साथ साथ महावीर सिंह राठौर भी 40 दिनों तक जेल के अंदर ही भूंख हड़ताल पर बैठे रहे, सजा के बाद कुछ दिनों तक पंजाब की जेलों में रखकर बाकी लोगो को (भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और किशोरी लाल के अतिरिक्त ) मद्रास प्रांत की विभिन्न जेलों में भेज दिया गया| महावीर सिंह और गयाप्रसाद को बेलोरी सेंट्रल जेल ले जाया गया, जहाँ से जनवरी 1933 में उन्हें उनके कुछ साथियो के साथ अंडमान निकोबार द्वीप पर काला पानी की सज़ा के लिए भेज दिया गया,


अंडमान निकोबार की सैल्यूलर जेल में स्थापित कासगंज के अमर बलिदानी महावीर सिंह राठौर की प्रतिमा।


महावीर सिंह के कपड़ों में उनके पिता का एक पत्र भी मिला था, जो उन्होंने महावीर सिंह के अंडमान से लिखे एक पत्र के उत्तर में लिखा था। इसमें लिखा था कि–”उस टापू पर सरकार ने देशभर के जगमगाते हीरे चुन -चुनकर जमा किए हैं...उन हीरों में से तुम भी एक नायाब हीरा हो...मुझे ख़ुशी है कि तुम्हें उन हीरों के बीच रहने का मौक़ा मिल रहा है। उनके बीच रहकर तुम और चमको, मेरा तथा देश का नाम अधिक रौशन करो, यही मेरा आशीर्वाद है।”

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