सोरों जी के संदर्भ में उद्योगपति रामगोपाल दुबे ने की राष्ट्रपति से मुलाकात, अब अगली मुलाकात में भी सोरों जी के सर्वांगीण विकास को लेकर होनी है विस्तृत चर्चा।


(अमित तिवारी) कासगंज। सोरों जी के संदर्भ में उद्योगपति रामगोपाल दुबे जी ने की राष्ट्रपति जी से मुलाकात, अब अगली मुलाकात में भी सोरों जी के सर्वांगीण विकास को लेकर होनी है विस्तृत चर्चा।

कासगंज मूल के उद्योगपति रामगोपाल दुबे जी इन दिनों सोरों जी शूकर क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को लेकर खासा प्रयासरत हैं, इस संदर्भ में उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी को एक ज्ञापन भी सौंपा है, आगामी दिनों में उत्तर प्रदेश के प्रमुख उद्योगपति रामगोपाल दुबे जी एक प्रतिनिधि मंडल के साथ महामहिम राष्ट्रपति जी से फिर एक मुलाकात करने वाले हैं, जिसमें तमाम आर्थिक सामाजिक व ढांचागत विकास के विषयों के संदर्भ में एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति जी से मुलाकात करेगा, उक्त विषयों पर चर्चा के अलावा पौराणिक तीर्थ नगरी सोरों जी के सर्वांगीण विकास के संदर्भ में एक ड्राफ्ट महामहिम राष्ट्रपति जी को सौंपा जा सकता है,



आदि तीर्थ सोरों जी शूकर क्षेत्र का संक्षिप्त पौराणिक महत्त्व : धरती पर जीवात्माओं के सृजन काल से ही सोरों जी मानव सभ्यता का प्रमुख केंद्र रहा है। मान्यता है कि सृष्टि में सभ्यता का सर्व प्रथम उदगम यहीं से हुआ है। ब्रह्मा जी के पुत्र मनु और मनु के पुत्र उत्तानपाद की राजधानी मानी जाती है सोरों जी। राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव (तारा) का जन्म यहीं हुआ थाभगवान विष्णु के तृतीय वराह अवतार की मोक्ष भूमि भी यही है। भू सम्राट हिरण्यकश्यप की राजधानी व प्रहलाद एवं होलिका का घर यही है। महर्षि भृगु की ससुराल यही है, शुक्राचार्य की ननिहाल यही है, भक्तिकाल के प्रमुख साहित्यकार हरिहरदास नरहरिदास नंददास तुलसीदास की जन्मस्थली यही है। चालुक्य राज वंश की उदगम स्थली यही है।
श्री महाप्रभु बल्लभाचार्य जी की 23 वीं बैठक यहीं है।  हिन्दू पौराणिक सभ्यता के अनगिनत ऋषियों मुनियों की साधना स्थली यही है। वृद्ध गंगा का पौराणिक मार्ग यही है। कपिल मुनि व भगीरथ की गुफा यहीं है। संसार के चार प्रमुख वट बृक्षों में से एक गृद्ध वट यहीं है। लाखों वर्ष पुरातन सीता राम मंदिर यहां है। देवी लक्ष्मी कुबेर और सौभाग्य का प्रतीक श्रीयंत्र यहां है। पुत्र प्राप्ति के लिए सूर्य की तपोस्थली यही है। श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रमा की तपोस्थली यही है। जल थल और वायु में मोक्ष यहीं है। जीवन मरण का रहस्य यहीं है। यहां प्रत्येक अमावस्यासोमवती अमावस्यापूर्णिमारामनवमी मोक्षदा एकादशी आदि अवसरों पर तीर्थयात्रियों का बड़ी संख्या में आवागमन होता है जो गंगा में स्नान कर पुण्य प्राप्त करते हैं। यहां अस्थि विसर्जन का विशेष महत्त्व है, हरि की पौड़ी में विसर्जित की गयीं अस्थियां चौबीस घंटों के अन्त तक रेणु रूप धारण कर लेती हैंऐसा प्रमाण आज भी प्रत्यक्ष है। यहां भगवान् वाराह का विशाल प्राचीन मन्दिर है। सोरों सूकरक्षेत्र के तीर्थपुरोहित जगत् विख्यात हैं, इनके पास प्रत्येक परिवार के पूर्वजों का वंशानुगत इतिहास मौजूद हैं जो समय के साथ अपडेट किये जाते रहते हैं। यहां का मार्गशीर्ष मेला प्रसिद्ध पौराणिक व पारंपरिक मेला है। धन्य है वो प्राणी जिसे अपने जीवनकाल के दौरान सोरों जी में प्रवास करने का अवसर प्राप्त होता है।

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