कासगंज : ग्यारवीं के छात्रों द्वारा बनाई साइकिल दे रही है 50 का माइलेज।




ग्यारवीं के छात्रों द्वारा बनाई साइकिल दे रही है 50 का माइलेज

स्मार्ट डस्टबिन से लेकर ड्रोन व् रोबोट भी बना चुके हैं अटल टिंकरिंग लेब के यह छात्र 

(अमित तिवारी) कासगंज। प्रतिभा धन समय सम्पदा स्थान परिस्थिति व प्रशिक्षण की मोहताज़ नहीं होती इस बात को कासगंज जैसे पिछड़े इलाके के ग्यारवीं कक्षा में अध्ययनरत कुछ छात्रों ने साबित करके दिखाया है, जनपद कासगंज के श्री सूरज प्रसाद डागा सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज में अध्यनरत चार छात्रों ने अपने विद्यालय में ही स्थापित अटल टिंकरिंग लेब के तत्वाधान में एक आम साइकिल पर बाइक का इंजन लगाकर उसे स्वचालित साइकल में तब्दील कर दिया है,  टंकी में पेट्रोल खत्म होने की स्थिति में इस साइकिल को पैर से पैडल मारकर आम साइकिल की तरह भी दौड़ाया जा सकता है इस स्वचालित मोटो-साइकिल में वाकायदा 80 सीसी का 2 स्ट्रोक इंजन व 2.5 लीटर की पेट्रोल टंकी फिट फिट की गयी है, जिसे ऐसेम्बल करने में महज़ तीन दिन का वक्त लगा है, इस मोटो-साइकल को बनाने में कुल 20 हज़ार रूपये की लागत आयी है जो अभी 50 किलोमीटर प्रति लीटर पेट्रोल का माइलेज दे रही है, माइलेज को 50 किलोमीटर प्रतिलीटर से 100 किलोमीटर प्रति लीटर तक करने के तकनीकी परिवर्तनों पर भी काम किया जा रहा है, इस नवोत्थान में चार छात्रों मलयराज त्रिपाठीदेशराज, मोहित कुमार  ललित की अनूठी सामूहिक योजना रही है,
इस स्वचालित साइकिल को बनाने वाले छात्र अब इसे आगामी विज्ञान प्रतियोगिता में प्रस्तुत करने वाले हैंआने वाले दिनों में इन बाल वैज्ञानिकों का यह दल अब एक आम साइकिल को ई-साइकिल में तब्दील करने की योजना पर भी काम कर रहा है,  एक आम साइकिल में ही इलेक्ट्रिक मोटर बेंटरी स्थापित करके ई-साइकिल बनाई जानी है 

14 फरबरी को तैयार हुयी यह स्वचालित मोटो-साइकिल कासगंज में खासी चर्चा का विषय बनी हुयी है, सड़क पर दौड़ती इस स्वचालित मोटो-साइकिल को देखकर लोग इस बात से आश्चर्यचकित हैं कि इन छोटे छोटे स्कूली बच्चों ने ऐसा अविष्कार कैसे कर दिखाया,

तकनीकी नवोत्थान की इस प्रक्रिया में सिढ़पुरा फतेहपुर निवासी ग्यारवीं कक्षा के 16 वर्षीय छात्र मलयराज त्रिपाठी ने इस स्वचालित साइकिल के अलावा एक स्मार्ट डस्टबिन से लेकर ड्रोन व रोबोट भी तैयार किया है

स्मार्ट डस्टबिन के बारे में मलयराज ने बताया कि यह डस्टबिन आम डस्टबिन से विल्कुल अलग, इस डस्टबिन में एक ख़ास तरह का सेंसर लगा है जिसमें कूड़े को डस्टबिन में डालते समय उसका ढक्कन स्वतः खुल जायेगा 


इसके अलावा ड्रोन व् रोबोट में भी अद्वितीय तकनीकी का इस्तेमाल किया गया है 

दरअसल भारतीय नीति आयोग की योजना के अंतर्गत जनपद कासगंज में 1 अटल टिंकरिंग लेब की स्थापना हुई है जहां युवा अपने दिमाग व् अद्वितीय स्थानीय समस्याओं को हल करने के लिए अपने विचारों को गति देंगेइस योजना के पहले चरण में वर्ष 2020 तक भारत में वन मिलियन नियोटरिक चाइल्ड इनोवेटर्स बनाने के मिशन पर काम किया जा रहा है, देशभर में 2441 स्कूलों को अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने के लिए चुना गया है, जनपद कासगंज के श्री सूरज प्रसाद डागा सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज में भी ऐसी ही एक अटल टिंकरिंग लेब स्थापित की गयी है, कासगंज में स्थापित इस अटल टिंकरिंग लेब के छात्र आये दिन कुछ कुछ नए तकनीकी प्रयोगों को जन्म दे रहे हैं


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