(अमित तिवारी) कासगंज: 22 मार्च विश्व जल दिवस- पेयजल के रूप में धीमे जहर का घूंट भर रहे हैं हम।




(अमित तिवारी) कासगंज: 22 मार्च विश्व जल दिवस- पेयजल के रूप में धीमे जहर का घूंट भर रहे हैं हम। 

22 मार्च विश्व जल दिवस के रूप में मनाया जाता है, पूरी दुनिया पेयजल शुद्धता व संरक्षण को लेकर खासी चिंतित है, धरती पर सिर्फ 3 प्रतिशत जल ही पीने योग्य है, जल पृथ्वी की सतह पर सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला अणु है, प्रकृति में यह तरल ठोस और गैसीय अवस्था में मौजूद है, पीने योग्य मीठे जल का सर्वाधिक स्रोत भूजल भंडार ही है, पीने के पानी की गुणवत्ता लगातार गिर रही है जिसका प्रमुख कारण गिरता भूजल स्तर व कृषि उपज में प्रयुक्त अकार्बनिक रसायनों के मिश्रण इसका प्रमुख कारक है,



केंद्रीय भूजल बोर्ड के आंकड़ों पर अगर ठीक से गौर करें तो जनपद कासगंज में पेयजल के रूप में हम लगातार धीमे जहर का घूंट भर रहे हैं,




पिछले कुछ वर्षों की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ब्लॉक गंजडुंडवारा में 276 टीडीएस, सहावर में 300, अमांपुर में 306, पटियाली में 354, कासगंज में 354, सिढ़पुरा में 636 तो वहीं सोरों ब्लॉक में टीडीएस लेवल 1860 पाया गया है, सिढ़पुरा और सोरों ब्लॉक में पेयजल का इतना अधिक टीडीएस लेवल एक सामान्य लिमिट से कहीं अधिक है, जिसके नकारात्मक प्रभाव इस पानी को पीने वाले लोगों में नज़र आ रहे हैं,



भूजल बोर्ड लखनऊ की एक रिपोर्ट के मुताबिक जनपद कासगंज में फ्लोराइड व सेलिनिटी काफी ज्यादा है,




कासगंज के रहने वाले रसायन वैज्ञानिक कृष्ण कांत त्रिपाठी के अनुसार सिढ़पुरा व सोरों की यह टीडीएस वैल्यू एक सामान्य मात्रा से कहीं अधिक है,

श्री त्रिपाठी जी कहते हैं कि टीडीएस में अकार्बनिक लवण जिनमें मुख्यतः कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, सोडियम, बाइकार्बोनेट, क्लोराइड और सल्फेट्स एवं कुछ छोटी मात्रा में कार्बनिक पदार्थ पानी में विघटित होते है और विशेष रूप से भूजल में नाइट्रेट भी पाया जाता हैं,
टीडीएस मिलीग्राम प्रति इकाई मात्रा - मिलीग्राम /लीटर की इकाइयों में व्यक्त की जाती है या इसे प्रति मिलियन अर्थात पीपीएम भागों के रूप में भी संदर्भित किया जाता है, टीडीएस का उपयोग यह देखने के लिए किया जाता है कि पानी शुद्ध या पीने योग्य है या नहीं और टीडीएस यह भी संकेत करता है कि उसमें रासायनिक संदूषक हैं या नहीं,

पेयजल में बढ़ती रासायनिकता का प्रमुख कारण लगातार गिरता भूजल स्तर व कृषि उपज में प्रयुक्त अकार्बनिक रासायनों का उपयोग एक बड़ा कारक है,


कासगंज से संदर्भित भूजल बोर्ड की रिपोर्ट देखकर श्री त्रिपाठी जी ने बताया कि As Per IS Standard - 10500: 2012 के अनुसार सिढ़पुरा सोरों ब्लॉक के पेयजल भंडार में लगातार बढ़ती लवणता स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद खतरे का संकेत है,




जनपद कासगंज के पेयजल में लगातार बढ़ती सेलिनिटी (लवणता) व फ्लोराइड के स्टेट्स को लेकर प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ आशीष गुप्ता जी कहते हैं कि पेयजल में अत्यधिक बढ़ते लवण/फ्लोराइड हमारे सम्पूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित व असंतुलित कर रहे है, लोग अनेक प्रकार की बीमारियों की गिरफ्त में जकड़ते जा रहे हैं, वहीं पेयजल में बढ़ता फ्लोराइड जो कि हमारी हड्डियों में चिपककर उसका कंपोनेंट बन जाता है, जिसके कारण हड्डियों का लचीलापन एक तय मानक से कम होता जाता है, फ़ॉलोराइड बढ़ने से फ्रेक्चर होने की संभावना कहीं अधिक बढ़ जाती है, इसके अलावा हमारा पैराथाइराइड हार्मोन्स भी प्रभावित हो रहा है, वहीं पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक हो जाने पर शरीर का कैल्शियम स्टेट्स भी असुंतलित होता है,

पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा तय मानकों से अधिक होने पर 6 वर्ष से नीचे आयु के बच्चे इससे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, इसकी अधिक मात्रा के कारण इस आयु के बच्चों का बौद्धिक विकास प्रभावित हो रहा है,

रसायन वैज्ञानिक कृष्णकांत त्रिपाठी जी व कासगंज के प्रमुख चिकित्सक डॉ आशीष गुप्ता जी के अलावा हमने कई पर्यावरणविद से पेयजल संरक्षण के तमाम विन्दुओं पर विस्तृत मंथन किया,




हमें पेयजल शुद्धता व संरक्षण को लेकर बेहद जागरुक और सतर्क रहने की जरूरत है, प्राकृतिक व कृत्रिम रूप से भूजल पुनर्भरण की दिशा में प्रयास करने होंगे, कृषि उपज में अकार्बनिक रसायन के बजाय कार्बनिक रासायनों के उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी,

अगर अभी से इस दिशा कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया तो आने वाले समय में इसके भयंकर दुष्परिणाम मानव जाति का काल बनकर हमारे सामने होंगे।

Comments

webmedia.page

साइकिल से ही यूरोप अफ्रीका व अरब देशों को पार कर सोरों जी पहुंचे रूसी यात्री मिखायू,

गंगा एक्सप्रेसवे बनने से कासगंज की तराई हो सकती है आर्थिक गलियारे के रूप में विकसित।

कासगंज: वेस्ट सेल्फी इन द वर्ल्ड - छोटे शहर से इंटरनेशनल स्टार्टअप।

सोरों जी के संदर्भ में उद्योगपति रामगोपाल दुबे ने की राष्ट्रपति से मुलाकात, अब अगली मुलाकात में भी सोरों जी के सर्वांगीण विकास को लेकर होनी है विस्तृत चर्चा।

हज़ारों चीखें न निकलें उससे पहले इसकी कराह सुन ली जाए तो बेहतर है,

कासगंज के आरके मिश्रा ने डिजाइन किया था तेजस का कॉकपिट- दशकों बाद अब वायुसेना में शामिल हुआ भारत का यह पहला लड़ाकू विमान,

कासगंज : ग्यारवीं के छात्रों द्वारा बनाई साइकिल दे रही है 50 का माइलेज।