कासगंज की दूध डेयरियां पर्यावरण में घोल रहीं हैं जहर!



कासगंज की दूध डेयरियां पर्यावरण में घोल रहीं हैं जहर!

(अमित तिवारी) कासगंज। ईटीपी के बिना ही संचालित मिल्क डेयरी पर्यावरण में घोल रहीं हैं जहर।
औद्योगिक दृष्टिकोण से जनपद कासगंज दुग्ध उत्तपादन प्रसंस्करण व निर्यात का एक बड़ा केंद्र है, 
जनपद कासगंज में दूध प्रसंस्करण करने वाली तकरीबन दर्जनभर डेयरियां संचालित हैं, 

एक अनुमान के मुताबिक जनपद में 6 लाख लीटर से अधिक दूध का उत्त्पादन होता है, जिसमें से बाजार में बिक्री के लिए तकरीबन 3 लाख लीटर दूध जो कि इन 1 दर्जन से अधिक डेयरियों में प्रसंस्करित होता है,

हैरत की बात यह है कि जनपद कासगंज स्थित औद्योगिक स्वरूप में संचालित इन 1 दर्जन डेयरियों के पास कोई स्टेंडर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर तक मौजूद नहीं है,

दरअसल औद्योगिक नीति व पर्यावरण संरक्षण नियमों के मुताबिक दुग्ध उत्पाद को प्रसंस्करित करने वाली इन डेयरियों के पास Effluent treatment plant
(प्रवाही उपचार सयंत्र) ETP का होना अनिवार्य है, लेकिन जनपद कासगंज में संचालित इन दुग्ध डेयरियों में ETP स्थापित नहीं है,
दुग्ध प्रसंस्करण के समय डेयरी से दूषित जल के साथ कई प्रकार के हानिकारक रसायन इकट्ठे होते हैं, 

पर्यावरण व मानव जीवन के लिए अत्यंत घातक इस दूषित जल का बिना उपचार किये कासगंज के सभी डेयरी संचालक इसे एकत्र कर बड़े बड़े टेंकरों के जरिये शहर के बाहरी इलाकों में व तालाबों फेंक रहे हैं, इसके अलावा भी जानकारी मिल रही है कि कासगंज के एक बड़ी डेयरी में ईटीपी स्थापित होते हुए भी वह उसका प्रयोग न करते हुए फेक्ट्री का दूषित जल बिना उपचार के ही पास के नाले में प्रवाहित कर रहे हैं, ऐसा करना औद्योगिक पर्यावरण व नैतिक नियमों के विपरीत है, लेकिन स्थानीय औद्योगिक इकाई जानकारी के वावजूद इस गंभीर मामले पर मौन साधे हुए है,
अगर निरंतर इसी प्रकार इन डेयरियों से निकलने वाला दूषित अम्लीय जल प्रवाहित होता रहा तो भूगर्भीय जल पुनर्भरण के दौरान यह अम्लीय जल हमारे भूजल संग्रह को दूषित करता रहेगा, भविष्य में जिसके परिणाम अत्यंत भायाभव होंगे।

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